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फरेब थी हँसी उनकी

( नम्रता राणा द्वारा दिनाँक 07-01-2018 को प्रस्तुत )
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फरेब थी हँसी उनकी हम आशिकी समझ बैठे,
मौत को ही हम अपनी ज़िंदगी समझ बैठे,
वो वक़्त का मज़ाक था या हमारी बदनसीबी,
जो उनकी दो बातों को मोहब्बत समझ बैठे।

फरेब थी हँसी उनकी शायरी
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