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अगर आशिक़ है तो

( दिवाकर शर्मा नादान द्वारा दिनाँक 10-01-2018 को प्रस्तुत )
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आशिक़ है तो आशिक़ी का
दीदार होना चाहिये,
मेरी तरह उसे शक़्ल से
बीमार होना चाहिए।

जो जितना हुआ बरबाद,
वो उतना बड़ा आशिक़,
जीते जी दफ़न होके भी
औरों को दे गया वो सीख।

सम्मान से न उसका कोई
सरोकार होना चाहिये,
मेरी तरह उसे शक़्ल से
बीमार होना चाहिए।

अपने यार के परिवार से
जो जम के पिटा हो,
खुद के बचाव में क़भी
हाथ न उसका उठा हो।

कम से कम एक बार तो
गिरफ्तार होना चाहिए,
मेरी तरह उसे शक़्ल से
बीमार होना चाहिए।

ताला यूं चलते काम में
लगाने का दम भी हो,
अर्श में रहे या फर्श में
पर कहीं जुनूँ कम न हो।

और कुछ भले हो न हो
बेरोजगार होना चाहिये,
मेरी तरह उसे शक़्ल से भी
बीमार होना चाहिए।

शामियाने निकाहे यार के
लगाने का जिगर हो,
बारातियों के इक़बाल की
बस उसको फिकर हो।

उसके बच्चों से मामा सुनने को
भी तैयार होना चाहिये,
मेरी तरह उसे शक़्ल से
बीमार होना चाहिये।

आशिक़ है तो आशिक़ी का
दीदार होना चाहिये,
मेरी तरह उसे शक़्ल से
बीमार होना चाहिए।

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