खुशनुमा वक़्त को कुछ

खुशनुमा वक़्त को कुछ इस तरह काटा जाए,
हुस्न का नशा चाहने वालों में बराबर बांटा जाए,
कुछ पास तुम आओ तो कुछ पास हम चले आयें,
बेमतलब की दूरियों को कुछ इस तरह पाटा जाए।
~एकांत नेगी

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