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हिंदी में ग़म शायरी

ताल्लुक़ का बोझ...

तमाम उम्र ताल्लुक़ का बोझ कौन सहे,
उसे कहो के चुका ले हिसाब कितने हैं।

ताल्लुक़ का बोझ शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 25-08-2018 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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ग़म होते हैं पी जाने के लिए...

आँसू होते नहीं बहाने के लिए,
ग़म होते हैं पी जाने के लिए,
मत सोचना किसी को पाने के लिए,
वरना जिंदगी कम पड़ जाएगी,
उसको भुलाने के लिए।

अमन सिंह द्वारा दिनाँक 24-08-2018 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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ज़िन्दगी हमारी सितम...

ज़िन्दगी हमारी यूँ सितम हो गई,
खुशी न जाने कहाँ दफन हो गई,
लिखी खुदा ने मोहब्बत सबकी तकदीर में,
हमारी बारी आई तो स्याही खत्म हो गई।

लक्ष्मी शुक्ला द्वारा दिनाँक 24-07-2018 को प्रस्तुत | कमेंट करें

ग़म का अँधेरा...

प्यार की राह में ग़म का अँधेरा आता क्यूँ है,
जिसको हमने चाहा वही रुलाता क्यूँ है,
वो मेरे नसीब में नहीं है तो खुदा,
बार-बार हमें उसी से मिलाता क्यूँ है।

ग़म का अँधेरा शायरी
रवि देवेश द्वारा दिनाँक 10-07-2018 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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ग़म के रास्ते पे...

भटकते रहे हैं बादल की तरह,
सीने से लगा लो आँचल की तरह,
ग़म के रास्ते पे ना छोड़ना अकेले,
वरना टूट जाएँगे पायल की तरह।

शिव कुमार द्वारा दिनाँक 10-07-2018 को प्रस्तुत | कमेंट करें

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