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हिंदी में शिक़वा शायरी

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क्या पा लोगे तुम...

तलाशी मेरे हाथों की लेकर क्या पा लोगे तुम,
चंद लकीरों में छिपे अधूरे से कुछ किस्से हैं।

क्या पा लोगे तुम शायरी

पत्थरों से दुआ...

जब मोहब्बत को लोग खुदा मानते हैं,
फिर क्यूँ प्यार करने वालों को बुरा मानते हैं,
माना कि ये ज़माना पत्थर दिल है,
फिर क्यूँ लोग पत्थरों से दुआ माँगते हैं?

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क्यों तन्हा कर देते हो...

क्यों तन्हा कर देते हो यूँ दूर जाकर,
इंतज़ार करते हैं हम बेक़रार होकर,
वक्त बदलता है माना हमने,
न छोड़ कर जाया करो अनजान बनकर।

सलीके की दाद दे...

मेरी मोहब्बत की न सही,
मेरे सलीके की तो दाद दे,
तेरा ज़िक्र रोज करते हैं
तेरा नाम लिए वगैर।

सलीके की दाद दे शायरी

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हमसे कहा होता...

औरों से कहा तुमने... औरों से सुना तुमने,
कभी हमसे कहा होता कभी हमसे सुना होता।

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