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अकबर इलाहाबादी की शायरी

तारीफ़ शायरी

ये दिलबरी ये नाज़...

ये दिलबरी, ये नाज़, ये अंदाज़, ये जमाल,
इंसान करे अगर न तेरी चाह... क्या करे।

~ अकबर इलाहाबादी
एडमिन द्वारा दिनाँक 31.12.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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