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हिंदी में प्रेरक शायरी

मुकद्दर खुद बनाता हूँ...

मुसीबत के साये में मैं हँसता-हँसाता हूँ,
ग़मों से उलझ कर भी मैं मुस्कराता हूँ,
हाथों में मुकद्दर की लकीरें है नहीं लेकिन,
मैं तो अपना मुकद्दर खुद बनाता हूँ।

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हौसलों के सामने...

हाथ बाँधे क्यों खड़े हो हादसों के सामने,
हादसे कुछ भी नहीं हैं हौसलों के सामने।

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जीतने का मजा...

खोकर पाने का मज़ा ही कुछ और है,
रोकर मुस्कुराने का मज़ा ही कुछ और है,
हार तो जिंदगी का हिस्सा है मेरे दोस्त,
हार के बाद जीतने का मजा ही कुछ और है।

कभी हार नहीं होती...

लहरों को साहिल की दरकार नहीं होती,
हौसला बुलंद हो तो कोई दीवार नहीं होती,
जलते हुए चिराग ने आँधियों से ये कहा,
उजाला देने वालों की कभी हार नहीं होती।

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कर्म करो बस तुम...

कर्म करो बस तुम अपना लोग उसे जानेगें ही,
आज नहीं तो कल ही सही लोग तुम्हें पहचानेगें ही।

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