Jaun Elia Shayari

तुम जब आओगी तो

तुम जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझे,
मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहीं,
मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हें,
मेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं।

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दर्द बदनाम तो नहीं होगा

चारासाजों की चारा-साजी से,
दर्द बदनाम तो नहीं होगा,
हाँ दवा दो मगर ये बतला दो,
मुझको आराम तो नहीं होगा।

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अपना घर भूल गए

और क्या चाहती है गर्दिश-ए-अय्याम कि हम
अपना घर भूल गए उनकी गली भूल गए।

इक बेदिली रही

कल दोपहर अजीब इक बेदिली रही
बस तिल्लियाँ जलाकर बुझाता रहा हूँ मैं।

रूहों के पर्दा-पोश गुनाहों से बे-ख़बर
जिस्मों की नेकियाँ ही गिनाता रहा हूँ मैं।

शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई
लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं।

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इलाज ये है कि

इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ,
वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैंने।

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शख़्स भी मेरा नहीं हुआ

सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई,
देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ।