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हिंदी में शिक़वा शायरी

मेरी भूल की सजा...

मेरी भूल की सजा कब तक दोगे,
कब तक मुझसे रूठे रहोगे,
माफ़ कर दो अब तो मुझे,
यूं ही कब तक खफा रहोगे।

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बातों का रुख...

कहते-कहते बदल देता है क्यूँ बातों का रुख,
क्यूँ खुद अपने आप के साथ वो सच्चा नहीं।

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किस तरह ऐतबार करें...

कब तलक तुझपे इंहिसार करें,
क्यों न अब दूसरों से प्यार करें,
तू कभी वक़्त पर नहीं पहुंचा,
किस तरह तेरा ऐतबार करें।
- सईद वासी शाह

शिक़वा तुम्हारा न कर सके...

एक पल की जुदाई भी गंवारा न कर सके,
ऐसा वाला इश्क़ हम दोबारा न कर सके,
ज़िन्दगी भर पलट के भी न देखा तुमने,
हम फिर भी शिक़वा तुम्हारा न कर सके।

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क्यों इम्तिहान लेते हो...

क्यों अपने इस आशिक का, परवानों में नाम लेते हो,
कह कर कि दिल दोगे... हमारी जान लेते हो,
पता है नहीं रख सकते, हम अपनी धड़कनों पे काबू,
फिर क्यों हमारी मोहब्बत का इम्तिहान लेते हो।

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