होम / शायर : मीर तक़ी मीर

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नाज़ुकी लब की...


नाज़ुकी उसके लब की क्या कहिए,
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है।

- मीर तक़ी मीर

नाज़ुकी लब की शायरी

एडमिन द्वारा दिनाँक 02.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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बेदिल ना समझें...


वो दिल लेकर हमें बेदिल ना समझें उनसे कह देना,
जो हैं मारे हुए नज़रों के उनकी हर नज़र दिल है।

- मीर तक़ी मीर


एडमिन द्वारा दिनाँक 28.08.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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