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परछाइयों के शहर की

( मनोज सिंह द्वारा दिनाँक 19-02-2015 को प्रस्तुत )
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परछाइयों के शहर की तन्हाईयाँ ना पूछ;
अपना शरीक-ए-ग़म कोई अपने सिवा ना था।

~ मुमताज़ राशिद
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