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ये क़ातिलों का शहर

( एडमिन द्वारा दिनाँक 03-06-2016 को प्रस्तुत )
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तू हवा के रुख पे चाहतों का
दिया जलाने की ज़िद न कर,
ये क़ातिलों का शहर है यहाँ तू
मुस्कुराने की ज़िद न कर।

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