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गुजरे है इस मुकाम...


( अनंत सैनी द्वारा दिनाँक 16.10.16 को प्रस्तुत )
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गुजरे हैं इश्क़ में हम इस मुकाम से
नफरत सी हो गई है मोहब्बत के नाम से
हम वह नहीं जो मोहब्बत में रो कर के
जिंदगी को गुजार दे...
अगर परछाई भी तेरी नजर आ जाए
तो उसे भी ठोकर मार दें।

गुजरे है इस मुकाम



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