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फ़िक्र ये थी कि शब ए हिज्र

( एडमिन द्वारा दिनाँक 04-02-2015 को प्रस्तुत )
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फ़िक्र ये थी कि शब-ए-हिज्र कटेगी कैसे,
लुत्फ़ ये है कि हमें याद न आया कोई।

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