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जलवे मचल पड़े

( एडमिन द्वारा दिनाँक 21-10-2016 को प्रस्तुत )
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जलवे मचल पड़े तो सहर का गुमाँ हुआ,
ज़ुल्फ़ें बिखर गईं तो स्याह रात हो गई।

जलवे मचल पड़े शायरी
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