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तुम्हें ग़ैरों से कब

( एडमिन द्वारा दिनाँक 25-03-2015 को प्रस्तुत )
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तुम्हें ग़ैरों से कब फुर्सत
हम अपने ग़म से कब ख़ाली,

चलो बस हो चुका मिलना
न तुम ख़ाली न हम ख़ाली ।।

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