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ज़माना खड़ा है

( एडमिन द्वारा दिनाँक 22-04-2015 को प्रस्तुत )
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ज़माना खड़ा है हाथों में पत्थर लेकर,
कहाँ तक भागूं शीशे का मुक़द्दर लेकर ।

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