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हुस्न की इन्तेहाँ

( एडमिन द्वारा दिनाँक 25-11-2016 को प्रस्तुत )
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हुस्न की ये इन्तेहाँ नहीं है तो और क्या है,
चाँद को देखा है हथेली पे आफताब लिए हुए।

हुस्न की इन्तेहाँ शायरी
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