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हमारे दरमियान...


( सचिन पटेल द्वारा दिनाँक 25.11.16 को प्रस्तुत )
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पता नहीं हमारे दरमियान यह कौन सा रिश्ता है,
लगता है कि सालों पुराना अधूरा कोई किस्सा है।
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तुम्हारे साथ आजकल यूँ हर जगह रहता हूँ मैं,
हद से ज्यादा सोचूं तुम्हें बस यहीं सोचता हूँ मैं।
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तुम्हारी तस्वीरों में मुझे अपना साया दिखता है,
महसूस करता है जो यह मन वहीं तो लिखता है।
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तुम्हारी आवाज़ सुनने को हर पल बेक़रार रहता हूँ,
नहीं करूँगा याद तुम्हें मैं खुद से हर बार कहता हूँ।
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नाराज़ ना होना कभी बस यहीं एक गुज़ारिश है,
महकी हुई इन साँसों की साँसों से सिफ़ारिश है।
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बदल जाए चाहे सारा जग पर ना बदलना तुम कभी,
ख़्वाबों के खुशनुमा शहर में मिलने आना तुम कभी।




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