होम / ग़म शायरी / देखा गम का साया

देखा गम का साया...


( एडमिन द्वारा दिनाँक 27.11.16 को प्रस्तुत )
Advertisement

जहाँ भी देखा गम का साया,
तू ही तू मुझको याद आया,

ख्वाबों की कलियाँ जब टूटी,
ये गुलशन लगने लगा पराया,

दरिया जब जब दिल से निकला,
एक समंदर आँखों में समाया,

मेरे दामन में कुछ तो देते,
यूँ तो कुछ नहीं माँगा खुदाया।




Advertisement

आप इन्हें भी पसंद करेंगे

Advertisement
Ads from AdNow
loading...

« पिछला पोस्ट अगला पोस्ट »