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सरे बाज़ार निकलूं तो

( प्रियंका शर्मा द्वारा दिनाँक 19-06-2015 को प्रस्तुत )
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सरे बाज़ार निकलूं तो
आवारगी की तोहमत,
तन्हाई में बैठूं तो
इलज़ाम-ऐ-मुहब्बत ।

सरे बाज़ार निकलूं तो शायरी
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