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हद ए शहर से निकली तो

( एडमिन द्वारा दिनाँक 25-06-2015 को प्रस्तुत )
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हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली,
कुछ यादें मेरे संग पाँव पाँव चली ।

सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ,
वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली ।

हद ए शहर से निकली तो शायरी
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