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खिड़की से झांकता हूँ मै

( पंकज कुमार द्वारा दिनाँक 30-06-2015 को प्रस्तुत )
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खिड़की से झांकता हूँ मै,
सबसे नज़र बचा कर
बेचैन हो रहा हूँ,
क्यों घर की छत पे आ कर
क्या ढूँढता हूँ,
जाने क्या चीज खो गई है,
इन्सान हूँ,
शायद मोहब्बत हमको भी हो गई ।

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