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कभी धूप दे

( एडमिन द्वारा दिनाँक 23-04-2017 को प्रस्तुत )
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कभी धूप दे... कभी बदलियाँ,
दिलो जान से दोनों क़बूल हैं,
मगर उस नगर में न कैद कर,
जहाँ जिंदगी की हवा न हो।

कभी धूप दे शायरी
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