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तेरी ज़ुल्फ़ों की घटा

( इमरान मलिक द्वारा दिनाँक 12-06-2017 को प्रस्तुत )
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तेरी ज़ुल्फ़ों की घटाओं का मुंतज़िर हुआ जाता हूँ,
अब ये आलम है कि बारिश भी सूखी सी लगती है।

तेरी ज़ुल्फ़ों की घटा शायरी
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