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रेत का महल

( रविशंकर सोनारे द्वारा दिनाँक 12-06-2017 को प्रस्तुत )
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तुम क्यों बनाते हो रेत का महल,
एक दिन तुम्हीं इन्हें मिटाओगे,
आज तुम कहते हो कि तुम मेरे हो,
कल मेरा नाम तक भूल जाओगे।

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