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समंदर न डुबो पाया

( प्रवीण कुमार पांडेय द्वारा दिनाँक 06-01-2018 को प्रस्तुत )
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गर्दिश मे बसर कर ली ज़िन्दगी
उन चमकते सितारों की जरूरत नहीं है,
खुद ही गिरते और खुद ही संभलते हैं
अब किसी के सहारों की जरूरत नहीं है,
नदी हो दरिया हो या हो भंवर भी,
छू भी न पाये ऊँची लहरों की हलचल
समंदर भी न डुबो पाया मेरी कश्ती को
मुझे किसी किनारे की जरूरत नहीं है।
~प्रवीण कुमार पांडेय

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