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वो मुल्क़ कभी

( अनुज कुमार द्वारा दिनाँक 02-04-2018 को प्रस्तुत )
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जहाँ पक्षपात के फैले जाल होते हैं,
वहाँ हुनरमंदों के सपने बेहाल होते हैं,
वो मुल्क़ कभी तरक्की नहीं कर सकता,
जहाँ के वज़ीर ही दलाल होते हैं।

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