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जीना सिखाती है माँ

( विजय तोमर द्वारा दिनाँक 15-04-2018 को प्रस्तुत )
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हँसकर मेरा हर गम भुलाती है माँ,
मैं रोता हूँ तो सीने से लगाती है माँ,
बहुत दर्द दिया है इस ज़माने ने मुझको,
सबकुछ झेलकर जीना सिखाती है माँ।

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