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जिस दिये को हम

( मोहन नागोसे द्वारा दिनाँक 08-05-2018 को प्रस्तुत )
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हम भी कभी मुस्कुराया करते थे,
उजाले मेरे दर पर शोर मचाया करते थे,
उसी दिए ने जला दिया मेरे हाथों को,
जिस दिये को हम हवा से बचाया करते थे।

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