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ग़म के रास्ते पे

( शिव कुमार द्वारा दिनाँक 10-07-2018 को प्रस्तुत )
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भटकते रहे हैं बादल की तरह,
सीने से लगा लो आँचल की तरह,
ग़म के रास्ते पे ना छोड़ना अकेले,
वरना टूट जाएँगे पायल की तरह।

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