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ग़म का अँधेरा

( रवि देवेश द्वारा दिनाँक 10-07-2018 को प्रस्तुत )
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प्यार की राह में ग़म का अँधेरा आता क्यूँ है,
जिसको हमने चाहा वही रुलाता क्यूँ है,
वो मेरे नसीब में नहीं है तो खुदा,
बार-बार हमें उसी से मिलाता क्यूँ है।

ग़म का अँधेरा शायरी
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