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ज़ार-ज़ार रोई आँखें

( मोहम्मद आरिफ द्वारा दिनाँक 15-08-2018 को प्रस्तुत )
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ज़ार-ज़ार रोई आँखें ठहर गई दिल की धड़कन,
मेरे अपनों में मेरी औकात का मंज़र देखकर।

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