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मुकद्दर खुद बनाता हूँ

( बलदेव सैनी द्वारा दिनाँक 22-09-2018 को प्रस्तुत )
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मुसीबत के साये में मैं हँसता-हँसाता हूँ,
ग़मों से उलझ कर भी मैं मुस्कराता हूँ,
हाथों में मुकद्दर की लकीरें है नहीं लेकिन,
मैं तो अपना मुकद्दर खुद बनाता हूँ।

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