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और भी ज़ख्म हैं

( एडमिन द्वारा दिनाँक 03-01-2019 को प्रस्तुत )
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दिल कहता है मोहब्बत नहीं क़यामत है ये,
फिर दिल की दीवार पर तेरा चेहरा क्यूँ है,
और भी ज़ख्म हैं तेरे ज़ख्मों के सिवा,
तेरे ही ज़ख्म का दाग इतना गहरा क्यूँ है।

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