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हिंदी में ग़म शायरी

बदन में आग सी...

बदन में आग सी है चेहरा गुलाब जैसा है,
कि ज़हर-ए-ग़म का नशा भी शराब जैसा है,
इसे कभी कोई देखे कोई पढ़े तो सही,
दिल आइना है तो चेहरा किताब जैसा है।

~ अहमद फ़राज़
एडमिन द्वारा दिनाँक 19.10.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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फ़ासले भी बहुत...

ये कैसा सिलसिला है, तेरे और मेरे दरमियाँ,
फ़ासले भी बहुत हैं और मोहब्बत भी।

राकेश द्वारा दिनाँक 15.10.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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महफ़िल में हँसना...

महफ़िल में हँसना हमारा मिजाज बन गया,
तन्हाई में रोना एक राज बन गया,
दिल के दर्द को चेहरे से जाहिर न होने दिया,
बस यही जिंदगी जीने का अंदाज बन गया।

दुर्गेश मिश्र द्वारा दिनाँक 15.10.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

जब भी करीब...

जब भी करीब आता हूँ बताने के किये,
जिंदगी दूर रखती हैं सताने के लिये,
महफ़िलों की शान न समझना मुझे,
मैं तो अक्सर हँसता हूँ गम छुपाने के लिये.

जब भी करीब शायरी
रंजीत राही द्वारा दिनाँक 26.09.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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उनके हिस्से का गम...

इलाही उनके हिस्से का भी गम मुझको अता कर दे,
कि उन मासूम आंखों में नमी देखी नहीं जाती।

एडमिन द्वारा दिनाँक 15.09.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

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