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तन्हाई शायरी

तन्हाई में आँखों से...

कहीं पर शाम ढलती है कहीं पर रात होती है,
अकेले गुमसुम रहते हैं न किसी से बात होती है,
तुमसे मिलने की आरज़ू दिल बहलने नहीं देती,
तन्हाई में आँखों से रुक-रुक के बरसात होती है।

~ विशाल बाबू
विशाल बाबू द्वारा दिनाँक 27.09.17 को प्रस्तुत
बेवफा शायरी

दिल में बसे तो सही...

खुश हूँ कि मुझको जला के तुम हँसे तो सही,
मेरे न सही... किसी के दिल में बसे तो सही।

~ विशाल बाबू
विशाल बाबू द्वारा दिनाँक 06.10.17 को प्रस्तुत
इंतज़ार शायरी

अब तो आ जाइये...

शाम है बुझी बुझी वक्त है खफा खफा,
कुछ हंसीं यादें हैं कुछ भरी सी आँखें हैं,
कह रही है मेरी ये तरसती नजर,
अब तो आ जाइये अब न तड़पाइये।

हम ठहर भी जायेंगे राह-ए-जिंदगी में
तुम जो पास आने का इशारा करो,
मुँह को फेरे हुए मेरे तकदीर सी,
यूँ न चले जाइये अब तो आ जाइये।

~ विशाल बाबू
विशाल बाबू द्वारा दिनाँक 06.10.17 को प्रस्तुत
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