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मेरे दर्द की कैफियत

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बहुत जुदा है औरों से
मेरे दर्द की कैफियत,
ज़ख्म का कोई पता नहीं और
तकलीफ की इन्तेहाँ नहीं।

मेरे दर्द की कैफियत शायरी

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