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ज़ख्मों की बहार

तुमने जो दिल के अँधेरे में जलाया था कभी,
वो दिया आज भी सीने में जला रखा है,
देख आ कर दहकते हुए ज़ख्मों की बहार,
मैंने अब तक तेरे गुलशन को सजा रखा है।

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