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शहरयार की शायरी

हिंदी उर्दू ग़ज़ल

देख ली दुनिया...

जुस्तजू जिसकी थी उसको तो न पाया हमने,
इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने।

तुझको रुसवा न किया खुद भी पशेमाँ न हुये,
इश्क़ की रस्म को इस तरह से निभाया हमने।

कब मिली थी कहाँ बिछड़ी थी हमें याद नहीं,
ज़िन्दगी तुझ को तो बस ख्वाब में देखा हमने।

ऐ अदा और सुनाये भी तो क्या हाल अपना,
उम्र का लम्बा सफ़र तय किया तन्हा हमने।

~ शहरयार
देख ली दुनिया शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 24.11.17 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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सैड शायरी

ये क्या जगह है दोस्तो...

ये क्या जगह है दोस्तो ये कौन सा दयार है,
हद्द-ए-निगाह तक जहाँ ग़ुबार ही ग़ुबार है ।

~ शहरयार
एडमिन द्वारा दिनाँक 04.02.15 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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तन्हाई शायरी

हर मुलाक़ात का अंजाम...

हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यों है;
अब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमें।

~ शहरयार
एडमिन द्वारा दिनाँक 04.02.15 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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