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फ़ासले भी बहुत

( राकेश द्वारा दिनाँक 15-10-2016 को प्रस्तुत )
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ये कैसा सिलसिला है, तेरे और मेरे दरमियाँ,
फ़ासले भी बहुत हैं और मोहब्बत भी।

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