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शबे ग़म काट चुका

( एडमिन द्वारा दिनाँक 03-11-2016 को प्रस्तुत )
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आधी से ज्यादा शब-ए-ग़म काट चुका हूँ,
अब भी अगर आ जाओ तो ये रात बड़ी है।

शबे ग़म काट चुका शायरी
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