होम / हिंदी उर्दू ग़ज़ल / बिन बारिस बरसातें

बिन बारिस बरसातें

( संजीत पाराशर द्वारा दिनाँक 13-09-2017 को प्रस्तुत )
-Advertisement-

क्या पूछते हो कैसी ये बिन बारिस बरसातें है?
मेरी आँखों से जो गिरते है, तेरी ही सौगातें हैं।

सूखेगा अब कैसे मेरे आंखों का ये दरिया,
इस दरिया से होकर ही वो दिल में आते-जाते हैं।

ना लफ्ज नया ना हर्फ कोई ना कोई तराना नूतन,
भूली यादें याद आ जायें, वही गीत पुराने गाते हैं।

अब फासला हैं ही कहाँ तेरे-मेरे दरमियां,
हैं इतने करीब मगर, दूरियां दिखाते हैं।

अब आती नहीं हैं तेरी याद, ऐसी बात नहीं है,
मैं था तेरा आईना कभी, कहने भर की बातें हैं।

~संजीत पाराशर

-Advertisement-

आप इन्हें भी पसंद करेंगे

-Advertisement-
हमसे जुड़ें
फेसबुक पेज
पेज शेयर करें
 
© 2015-2019 हिंदी-शायरी.इन | डिसक्लेमर | संपर्क करें | साईटमैप
Best Shayari in hindi | Love Sad Funny Shayari and Status in Hindi