होम / हिंदी उर्दू ग़ज़ल / ज़िन्दगी तमाम कर दी

ज़िन्दगी तमाम कर दी

( शांती स्वरूप मिश्र द्वारा दिनाँक 04-06-2018 को प्रस्तुत )
-Advertisement-

हमने तो अपनी ज़िन्दगी तमाम कर दी,
अपनी तो हर साँस उनके नाम कर दी।

सोचा था कि कभी तो गुजरेगी रात काली,
पर उसने तो सुबह होते ही शाम कर दी।

समझ पाते हम मोहब्बत की सरगम को,
उसने सुरों की महफ़िल सुनसान कर दी।

कर लिया यक़ीन हमने भी उसके वादों पे,
मगर उसने तो बेरुखी हमारे नाम कर दी।

हम मनाते रहे ग़म अपनी मात पर चुपचाप,
मगर उसने तो मेरी चर्चा सरे-आम कर दी।

ये खुदगर्ज़ी ही आदमी की दुश्मन है "मिश्र",
जिसने इंसान की नीयत ही नीलाम कर दी।

~ शांती स्वरूप मिश्र
-Advertisement-

आप इन्हें भी पसंद करेंगे

-Advertisement-
हमसे जुड़ें
फेसबुक पेज
पेज शेयर करें
 
© 2015-2019 हिंदी-शायरी.इन | डिसक्लेमर | संपर्क करें | साईटमैप
Best Shayari in hindi | Love Sad Funny Shayari and Status in Hindi