होम / शायर : नासिर काज़मी

नासिर काज़मी की शायरी

महसूस की तेरी जरूरत...

ऐ दोस्त हमने तर्क-ए-मोहब्बत के बावजूद,
महसूस की है तेरी जरूरत कभी-कभी।

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जुदाइयों के ज़ख़्म...

जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िंदगी ने भर दिए,
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया।

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