हिंदी शायरी

ग़ालिब की उर्दू शायरी तुम न आए

तुम न आए तो क्या सहर न हुई,
हाँ मगर चैन से बसर न हुई,
मेरा नाला सुना ज़माने ने,
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई।
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बूए-गुल, नाला-ए-दिल, दूदे चिराग़े महफ़िल,
जो तेरी बज़्म से निकला सो परीशाँ निकला।
चन्द तसवीरें-बुताँ चन्द हसीनों के ख़ुतूत,
बाद मरने के मेरे घर से यह सामाँ निकला।
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हासिल से हाथ धो बैठ ऐ आरज़ू-ख़िरामी,
दिल जोश-ए-गिर्या में है डूबी हुई असामी,
उस शम्अ की तरह से जिस को कोई बुझा दे,
मैं भी जले-हुओं में हूँ दाग़-ए-ना-तमामी।

सहर = सुबह, बसर = गुजरना, नाला = शिकवा

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ग़ालिब की हिंदी उर्दू शायरी

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना,
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना।
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उग रहा है दर-ओ-दीवार से सबज़ा ग़ालिब,
हम बयाबां में हैं और घर में बहार आई है।
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घर में था क्या कि तेरा ग़म उसे ग़ारत करता,
वो जो रखते थे हम इक हसरत-ए-तामीर सो है।
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ज़िंदगी अपनी जब इस शक्ल से गुज़री,
हम भी क्या याद करेंगे कि ख़ुदा रखते थे।
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ता हम को शिकायत की भी बाक़ी न रहे जा,
सुन लेते हैं गो ज़िक्र हमारा नहीं करते।
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ग़ालिब तिरा अहवाल सुना देंगे हम उन को,
वो सुन के बुला लें ये इजारा नहीं करते।
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मुँद गईं खोलते ही खोलते आँखें ग़ालिब,
यार लाए मेरी बालीं पे उसे पर किस वक़्त।
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लो हम मरीज़-ए-इश्क़ के बीमार-दार हैं,
अच्छा अगर न हो तो मसीहा का क्या इलाज।

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दर्द देकर खुद सवाल मिर्ज़ा ग़ालिब

दर्द देकर खुद सवाल करते हो,
तुम भी गालिब, कमाल करते हो;

देख कर पुछ लिया हाल मेरा,
चलो इतना तो ख्याल करते हो;

शहर-ए-दिल मेँ उदासियाँ कैसी,
ये भी मुझसे सवाल करते हो;

मरना चाहे तो मर नही सकते,
तुम भी जीना मुहाल करते हो;

अब किस-किस की मिसाल दूँ तुमको,
तुम हर सितम बेमिसाल करते हो।

गालिब की शायरी सिसकियाँ लेता है वजूद

सिसकियाँ लेता है वजूद मेरा गालिब,
नोंच नोंच कर खा गई तेरी याद मुझे।
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इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ग़ालिब,
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।
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बोसा देते नहीं और दिल पे है हर लहज़ा निगाह,
जी में कहते हैं कि मुफ़्त आए तो माल अच्छा है।
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ज़िक्र उस परी-वश का और फिर बयाँ अपना;
बन गया रक़ीब आख़िर था जो राज़-दाँ अपना।
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कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीर-ए-नीम-कश को,
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता।

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KhudGarz Ban Gaye

Marzi Se Jeen Ki Bas Khwahish Ki Thi Maine,
Aur Wo Kehte Hain Ke KhudGarz Ban Gaye Ho Tum.

मर्जी से जीने की बस ख्वाहिश की थी मैंने,
और वो कहते हैं कि खुदगर्ज बन गये हो तुम।

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DilKash Andaaz

Bada Hi DilKash Andaaz Hai Tumhara,
Jee Karta Hoon Fanaah Ho Jaaun.
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Mehek Rahi Hai Zindagi Jiski Khushboo Se,
Wo Kaun Tha Jo Gujar Gaya Meri Yaadon Se.

बड़ा ही दिलकश अंदाज है तुम्हारा,
जी करता है की फनाह हो जाऊं ।
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महक रही है जिंदगी आज भी जिसकी खुशबू से,
वो कौन था जो यूँ गुजर गया मेरी यादों से।

Jab Ro Nahi Paate

Teri Jarurat, Tera Intezar Aur Ye Tanha Aalam,
Thak Kar Muskura Dete Hain Hum Jab Ro Nahi Paate.

तेरी जरूरत, तेरा इंतजार और ये तन्हा आलम,
थक कर मुस्कुरा देते हैं, हम जब रो नहीं पाते।

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Fir Ishq Ka Junoon

Fir Ishq Ka Junoon Chad Raha Hai Sar Pe,
MayKhane Se Kah Do Darwaza Khula Rakhe.
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Akele Hum Hi Shamil Nahi Iss Jurm Mein,
Najrein Jab Bhi Mili Thi Muskuraye Tum Bhi The.
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Log Puchhte Hain Kaun Si Duniya Mein Jeete Ho,
Arey... Ishq Mein Duniya Kahan Najar Aati Hai.

फिर इश्क़ का जूनून चढ़ रहा है सिर पे,
मयख़ाने से कह दो दरवाज़ा खुला रखे।
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अकेले हम ही शामिल नहीं इस जुर्म में जनाब,
नजरें जब भी मिली थी मुस्कराये तुम भी थे।
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लोग पूछते हैं कौन सी दुनिया में जीते हो,
अरे इश्क़ में दुनिया कहाँ नजर आती है।