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हिंदी में दो लाइन शायरी

कहीं ऐसा न हो जाये...

इरादे बाँधता हूँ, सोचता हूँ, तोड़ देता हूँ,
कहीं ऐसा न हो जाये, कहीं वैसा न हो जाये।

एडमिन द्वारा दिनाँक 29.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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लौ चिरागों की...

अभी महफ़िल में चेहरे नादान नज़र आते हैं,
लौ चिरागों की जरा और घटा दी जाये।

एडमिन द्वारा दिनाँक 28.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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शेर ओ सुखन...

शेर-ओ-सुखन क्या कोई बच्चों का खेल है?
जल जातीं हैं जवानियाँ लफ़्ज़ों की आग में।

एडमिन द्वारा दिनाँक 25.11.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

शब्दों से खेलती हूँ...

मैं शब्दों से खेलती हूँ हैरान होते हैं लोग,
करती हूँ हाले दिल बयान तो परेशान होते हैं लोग।

वीणा द्वारा दिनाँक 20.10.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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ख़्वाब की गहराई...

लगता है इतना वक़्त मेरे डूबने में क्यूँ...?
अंदाज़ा मुझ को ख़्वाब की गहराई से हुआ।

ख़्वाब की गहराई शायरी
एडमिन द्वारा दिनाँक 20.09.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

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