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हिंदी शायरी
कोई नया जख्म हिंदी शायरी
कितनी जल्दी दूर चले जाते है वो लोग,
जिन्हें हम जिंदगी समझ कर कभी खोना नहीं चाहते।
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आज कोई नया जख्म नहीं दिया उसने मुझे,
कोई पता करो वो ठीक तो है ना।
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कहाँ नहीं तेरी यादों के कांटे,
कहाँ तक कोई दामन बचा के चले।
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दम तोड़ जाती है हर शिकायत लबों पे आकर,
जब मासूमियत से वो कहती है मैंने क्या किया है?
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उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नहीं,
ये दिल उसका है, अपना होता तो बात और थी।
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उस दिल की बस्ती में आज अजीब सा सन्नाटा हैं ,
जिस में कभी तेरी हर बात पर महफ़िल सज़ा करती थी।
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तेरा नज़रिया मेरे नज़रिये से अलग था,
शायद तुझे वक्त, गुज़ारना था और मुझे जिन्दगी।
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डरता हूँ कहने से की मोहब्बत है तुम से,
कि मेरी जिंदगी बदल देगा तेरा इकरार भी और इनकार भी।
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सलीक़ा हो अगर भीगी हुई आँखों को पढने का,
तो फिर बहते हुए आंसू भी अक्सर बात करते हैं।
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ये भी एक तमाशा है इश्क ओ मोहब्बत में,
दिल किसी का होता है और बस किसी का चलता है।
BeIntehaan Mohabbat

Ghayal Karke Mujhe Usne Poochha,
Karoge Kya Fir Mohabbat Mujhse..?
Lahoo-Lahoo Tha Dil Magar...
Hothhon Ne Kaha... BeIntehaan... BeIntehaan.
घायल कर के मुझे उसने पूछा,
करोगे क्या फिर मोहब्बत मुझसे...?
लहू-लहू था दिल मगर
होंठों ने कहा
...बेइंतहा...बेइंतहा।
बेवफा ये खबर भी सुन

जो हुकुम करता है, वो इल्तज़ा भी करता है,
आसमान कही झुका भी करता है,
और तू बेवफा है तो ये खबर भी सुन ले,
इन्तेज़ार मेरा कोई वहा भी करता है.
Dawaa Mere Dard Ki

Na Kar Tu Intni Koshishein,
Mere Dard Ko Samajhne Ki,
Pehle Ishq Kar... Fir Chot Kha...
Fir Likh Dawaa Mere Dard Ki.
न कर तू इतनी कोशिशे,
मेरे दर्द को समझने की,
पहले इश्क़ कर,
फिर चोट खा,
फिर लिख दवा मेरे दर्द की।
Anmol Logon Se Dosti

Khush Hoon Aur Sabko Khush Rakhta Hoon,
Laparwah Hoon Fir Bhi Sabki Parwah Karta Hun,
Maloom Hai Koi Mol Nahi Hai Mera,
Fir Bhi...
Kuchh Anmol Logon Se Dosti Rakhta Hoon.
खुश हूँ और सबको खुश रखता हूँ,
लापरवाह हूँ फिर भी सबकी परवाह
करता हूँ..
मालूम है कोई मोल नहीं मेरा,
फिर भी,
कुछ अनमोल लोगों से
दोस्ती रखता हूँ।
शायरी ख्वाहिश नहीं मुझे मशहूर
ख्वाहिश नहीं मुझे मशहूर होने की।
आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है।
अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे,
क्योंकी जिसकी जितनी जरुरत थी उसने उतना ही पहचाना मुझे।
ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा भी कितना अजीब है,
शामें कटती नहीं, और साल गुज़रते चले जा रहे हैं।
बैठ जाता हूं मिट्टी पे अक्सर...
क्योंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है।
मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा,
चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना।
ऐसा नहीं है कि मुझमें कोई ऐब नहीं है पर
सच कहता हूँ मुझमे कोई फरेब नहीं है।
Mubarak Haseen Savera
Nayi Si Subah Aur Naya Sa Savera,
Sooraj Ki Kirno Mein Hawaaon Ka Basera,
Khule Aasmaan Mein Sooraj Ka Chehra,
Mubaraq Ho Aapko Yeh Haseen Savera.
Good Morning.
नयी सी सुबह, नया सा सवेरा,
सूरज की किरणों में हवाओं का बसेरा,
खुले आसमान में सूरज का चेहरा,
मुबारक हो आपको ये हसीं सवेरा.
सुप्रभात
