हिंदी शायरी

ग़म शायरी

ज़िंदगी में इतने ग़म थे...

कौन सा वो ज़ख्मे-दिल था जो तर-ओ-ताज़ा न था,
ज़िन्दगी में इतने ग़म थे जिनका अंदाज़ा न था,
'अर्श' उनकी झील सी आँखों का उसमें क्या क़ुसूर,
डूबने वालों को ही गहराई का अंदाज़ा न था।

~ अर्श सहबाई
ज़िंदगी में इतने ग़म थे शायरी
गुलकेश छावरी द्वारा दिनाँक 01-03-2019 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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जिंदगी शायरी

ज़िन्दगी दरस्त-ए-ग़म...

ज़िन्दगी दरस्त-ए-ग़म थी और कुछ नहीं,
ये मेरा ही हौंसला है की दरम्यां से गुज़र गया।

एडमिन द्वारा दिनाँक 27-02-2019 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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माँ शायरी

घर की तलाशी लूंगा...

मैं घर की इस बार
मुकम्मल तलाशी लूंगा,
पता नहीं ग़म छुपाकर
हमारे माँ-बाप कहाँ रखते थे?

इंज़माम इक़बाल पटेल द्वारा दिनाँक 27-02-2019 को प्रस्तुत | कमेंट करें
बेवफा शायरी

बेवफा हो जाओगे...

अपने तजुर्बे की आज़माइश की ज़िद थी,
वर्ना हमको था मालूम कि तुम बेवफा हो जाओगे।

बेवफा हो जाओगे शायरी
अनुराग अग्रवाल द्वारा दिनाँक 26-02-2019 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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हर्ट टचिंग लाइन

बीतते हुए लम्हे...

हाथ से बीतते हुए लम्हों को कैसे रोकूँ,
जो मुकद्दर-ए-ज़िन्दगी है उसे कैसे टोकूं,
खुदा न करे कि ऐसा लम्हा आये,
जो सारी ख्वाहिशों को संग ले जाए,
इजाज़त बस खुदा से इतनी चाहिए,
जितनी भी ज़िन्दगी है बस तेरी याद में बीत जाये।

तेरे बिना भी क्या ज़िन्दगी,
चलती तो हवाएं भी हैं,
तेरे बिना क्या ज़िन्दगी,
बदलते तो रुख भी हैं,
फर्क बस इतना सा है,
कि हवाओं और रुख का मोड़ होता है,
मैं तो यूँ भी तेरे बिना बेवजह हूँ।

राह चलते तो हजारों मुसाफिर मिलते हैं,
ज़िन्दगी में तो कई मुसाफिर अपने बनते हैं,
अपनों और गैरों में भी बहुत फर्क होता है,
कुछ पास होके भी दूर हैं,
कुछ दूर होके भी दिल के सबसे करीब हैं।

- सृष्टि श्रीवास्तव

सृष्टि श्रीवास्तव द्वारा दिनाँक 22-02-2019 को प्रस्तुत | कमेंट करें

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