Read Shayari in Hindi

मेरी ये बेचैनियाँ...


मेरी ये बेचैनियाँ... और उन का कहना नाज़ से,
हँस के तुम से बोल तो लेते हैं और हम क्या करें।



एडमिन द्वारा दिनाँक 26.09.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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तबस्सुम भी हया भी...


इश्वा भी है शोख़ी भी तबस्सुम भी हया भी,
ज़ालिम में और इक बात है इस सब के सिवा भी।



एडमिन द्वारा दिनाँक 26.09.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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दिन हुआ है तो...


दिन हुआ है तो रात भी होगी,
हो मत उदास कभी बात भी होगी,
इतने प्यार से दोस्ती की है,
जिन्दगी रही तो मुलाकात भी होगी.



करन कुमार द्वारा दिनाँक 26.09.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें

जब भी करीब...


जब भी करीब आता हूँ बताने के किये,
जिंदगी दूर रखती हैं सताने के लिये,
महफ़िलों की शान न समझना मुझे,
मैं तो अक्सर हँसता हूँ गम छुपाने के लिये.



रंजीत राही द्वारा दिनाँक 26.09.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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जीत किसके लिए...


जीत किसके लिए हार किसके लिए,
ज़िंदगी भर ये तकरार किसके लिए,
जो भी आया है वो जायेगा एक दिन,
फिर ये इतना अहंकार किसके लिए।



एडमिन द्वारा दिनाँक 24.09.16 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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