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शांती स्वरूप मिश्र की शायरी

हिंदी उर्दू ग़ज़ल

ज़िन्दगी तमाम कर दी...

हमने तो अपनी ज़िन्दगी तमाम कर दी,
अपनी तो हर साँस उनके नाम कर दी।

सोचा था कि कभी तो गुजरेगी रात काली,
पर उसने तो सुबह होते ही शाम कर दी।

समझ पाते हम मोहब्बत की सरगम को,
उसने सुरों की महफ़िल सुनसान कर दी।

कर लिया यक़ीन हमने भी उसके वादों पे,
मगर उसने तो बेरुखी हमारे नाम कर दी।

हम मनाते रहे ग़म अपनी मात पर चुपचाप,
मगर उसने तो मेरी चर्चा सरे-आम कर दी।

ये खुदगर्ज़ी ही आदमी की दुश्मन है "मिश्र",
जिसने इंसान की नीयत ही नीलाम कर दी।

~ शांती स्वरूप मिश्र
शांती स्वरूप मिश्र द्वारा दिनाँक 04-06-2018 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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हिंदी उर्दू ग़ज़ल

चुपचाप डसा करते हैं...

लोगों के दिल कहाँ, अब तो होंठ हँसा करते हैं,
खुशियों की जगह अब, कोहराम बसा करते हैं!

भला वो बात अब कहाँ जो कभी पहले थी यारो,
लोग उल्फ़त नहीं अब, नफ़रत का नशा करते हैं!

जिधर नज़र जाती है दिखती हैं मक्कारियां उधर,
यहाँ दाग़ियों के बदले अब, बेदाग़ फंसा करते हैं!

न होइए खुश इतना पाकर हमदर्दियां किसी की,
यही वो मेहरवां हैं जो, कहीं भी तंज कसा करते हैं!

न पिलाओ दूध उनको कभी अपने न होंगे "मिश्र",
यही तो ताक कर अवसर, चुपचाप डसा करते हैं!

~ शांती स्वरूप मिश्र
शांती स्वरूप मिश्र द्वारा दिनाँक 11-02-2018 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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हिंदी उर्दू ग़ज़ल

लोग समझ लेते हैं...

अंधेरों को भी लोग, उजाला समझ लेते हैं,
शातिरों को वो, अपना सहारा समझ लेते हैं।

मैं आज तक न समझ पाया खुद को यारो,
लोग हैं कि खुद को, क्या क्या समझ लेते हैं।

क़त्ल करते हैं बड़ी ही मासूमियत से वो,
पर लोग हैं कि उनको बेचारा समझ लेते हैं।

थमा रखी है पतवार फरेबियों के हाथों में,
लोग हैं कि भंवर को, किनारा समझ लेते हैं।

कपट की चाल ही तोड़ती है रिश्तों को "मिश्र",
लोग तो इसको ही, अपनी अदा समझ लेते हैं।

~ शांती स्वरूप मिश्र
शांती स्वरूप मिश्र द्वारा दिनाँक 11-02-2018 को प्रस्तुत | कमेंट करें
हिंदी उर्दू ग़ज़ल

हर एक चेहरे पर...

हर एक चेहरे पर मुस्कान मत खोजो,
किसी के नसीब का अंजाम मत खोजो।

डूब चुका है जो गंदगी के दलदल में,
रहने दो यारो उसमें ईमान मत खोजो।

फंस गया है जो मजबूरियों की क़ैद में,
उसके दिल में दबे अरमान मत खोजो।

जो पराया था आज अपना है तो अच्छा,
उसमें अब वो पुराने इल्ज़ाम मत खोजो।

आदमी बस आदमी है इतना समझ लो,
हर किसी में अपना भगवान मत खोजो।

ये इंसान तो ऐबों का खज़ाना है "मिश्र",
उसके दिल से कोई, रहमान मत खोजो।

~ शांती स्वरूप मिश्र
शांती स्वरुप मिश्र द्वारा दिनाँक 17-12-2016 को प्रस्तुत | कमेंट करें
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